शास्त्रों के अनुसार पुरुषोत्तम अधिक मास भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना गया है। इस पावन मास में भगवान विष्णु एवं भगवान शिव की संयुक्त उपासना करने से साधक को अक्षय पुण्य, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
हरिहरात्मक यज्ञ के दिव्य दर्शन मात्र से —
इस दिव्य महायज्ञ में भक्तों को अनुभव हो रहा है —
🔸 वेद मंत्रों की पवित्र गूंज
🔸 अग्निहोत्र की दिव्य ऊर्जा
🔸 संतों एवं विद्वान आचार्यों का आशीर्वाद
🔸 भगवान का अलौकिक श्रृंगार
🔸 भक्ति एवं श्रद्धा से परिपूर्ण वातावरण
काशी में किया गया यज्ञ, दान एवं सेवा अनंत गुना फलदायी माना गया है। यही कारण है कि दूर-दूर से श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन में सहभागी बन रहे हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम अधिक मास में विशेष रूप से —
का 33 स्थानों पर दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
ऐसा करने से भगवान विष्णु एवं भगवान शिव दोनों की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति, समृद्धि तथा पुण्य का आगमन होता है।
इस दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर पर तन, मन और श्रद्धा से यज्ञ, सेवा एवं दान में सहभागी बनें और अपने जीवन को धर्म एवं ईश कृपा से आलोकित करें।
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“हरि अनंत, हर कथा अनंता —
काशी में मिलता मोक्ष का पावन रास्ता।”
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